राही बदल गए
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011
नींद भरी आंखों से एक सपना देखा
दूर...मगर मैंने कोई अपना देखा
उसके कदमों की आहट सुनाई देती है
जिसे मैंने एक जमाने से नहीं देखा
वो लौट आएगी..इस बात का य़कीं था मुझे
पर कभी किसी को इतनी देर करते नहीं देखा
1 टिप्पणी:
Udan Tashtari
ने कहा…
सब्र करें...
10 फ़रवरी 2011 को 10:18 am बजे
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
akhlaque.sifer.blogspot.com
दुनियाभर में..
मेरी आवाज सुनो
Feedjit Live Blog Stats
मेरे बारे में
Syed Akhlaque Abdullah
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
साथी.. जो साथ चले
ब्लॉगर्स की चिंगारी
उड़न तश्तरी ....
तुम आदत में शुमार हो मेरी
4 हफ़्ते पहले
Rhythm of words...
नफ्स...
6 महीने पहले
अर्ज़ है...
अबकी बार खुले में शौच पर वार
9 वर्ष पहले
कस्बा qasba
जय श्रीराम
12 वर्ष पहले
मन का पाखी
ख़ामोश इल्तिज़ा
12 वर्ष पहले
1 टिप्पणी:
सब्र करें...
एक टिप्पणी भेजें