राही बदल गए
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011
नींद भरी आंखों से एक सपना देखा
दूर...मगर मैंने कोई अपना देखा
उसके कदमों की आहट सुनाई देती है
जिसे मैंने एक जमाने से नहीं देखा
वो लौट आएगी..इस बात का य़कीं था मुझे
पर कभी किसी को इतनी देर करते नहीं देखा
1 टिप्पणी:
Udan Tashtari
ने कहा…
सब्र करें...
10 फ़रवरी 2011 को 10:18 am बजे
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